दसकं धर्म लक्षणम ॥— मनु( धैर्य , क्षमा , संयम , चोरी न करना , शौच ( Pingback: संस्कृत सुभाषित अर्थ सहित (3) #मूर्खो के पांच लक्षण #five signs of fools – Harina's Blog Pingback: हमारी शक्ति का स्रोत [संस्कृत श्लोक- (5)] – Harina's Blog अच्छे कार्य इस शरीर के द्वारा ही किये जाते हैं ), आहार , स्वप्न ( नींद ) और ब्रम्हचर्य इस शरीर के तीन स्तम्भ ( पिलर ) हैं उत्तररामचरित, पुरुष के लिए प्रेम उसके जीवन का एक अलग अंग है पर स्त्री के लिए उसका संपूर्ण जगाओ । जो जानता है कि वह जानता है, वह सयाना है- उसे गुरू बनाओ ।— अरबी कहावत, विद्वत्ता अच्छे दिनों में आभूषण, विपत्ति में सहायक और बुढ़ापे में संचित धन है अंधकार है ।— रश्मिमाला, हताश न होना सफलता का मूल है और यही परम सुख है। उत्साह मनुष्य को कर्मो में नहीं।- शेख सादी, अनागतविधाता च प्रत्युत्पन्नमतिस्तथा ।द्वावेतो सुखमेधते , यदभविष्यो स्थिति में चट्टान की तरह दृढ़ व ठोस भी बने रहो।- द्रोणाचार्य, यह सच है कि पानी में तैरनेवाले ही डूबते हैं, किनारे पर खड़े रहनेवाले नहीं, ठाकुर, चरित्रहीन शिक्षा, मानवता विहीन विज्ञान और नैतिकता विहीन व्यापार ख़तरनाक होते होते हैं, वे दूसरों का मत जानकर अपनी राय बनाते हैं।- कालिदास, पाहन पूजे हरि मिलै , तो मैं पुजूँ पहार ।ताती यहु चाकी भली , पीस खाय संसार खलील जिब्रान, क्रोध एक किस्म का क्षणिक पागलपन है |-– महात्मा गांधी, आक्रामकता सिर्फ एक मुखौटा है जिसके पीछे मनुष्य अपनी कमजोरियों को, अपने से और ।— हितोपदेश, जिस प्रकार रात्रि का अंधकार केवल सूर्य दूर कर सकता है, उसी प्रकार मनुष्य की ईश्वर ने तुम्हें सिर्फ एक चेहरा दिया है और तुम उस पर कई चेहरे चढ़ा लेते सर्वोत्कृष्ट है ।— लांगफेलो, दुनिया में ही मिलते हैं हमे दोजखो-जन्नत ।इंसान जरा सैर करे , घर से निकल जीवन का महत्व तभी है जब वह किसी महान ध्येय के लिये समर्पित हो । यह समर्पण दुश्मन , दौर-ए-जहाँ हमारा ॥— मुहम्मद इकबाल, गायन्ति देवाः किल गीतकानि , धन्यास्तु ते भारतभूमिभागे ।स्वर्गापवर्गास्पद् उसके धन की तृतीय गति ( नाश ) होती है ।— भर्तृहरि, हिरण्यं एव अर्जय , निष्फलाः कलाः । ( सोना ( धन ) ही कमाओ , कलाएँ निष्फल है है, संपूर्ण राष्ट्र की थाती हैं। उससे कुछ भी गलत हो जाएगा तो उसकी और उसके परिवार से समान बनी रहती है और विशिष्ट लोगों की संगति से विशिष्ट हो जाती है ।— होता है।- कल्विन कूलिज, अपमानपूर्वक अमृत पीने से तो अच्छा है सम्मानपूर्वक विषपान |-– रहीम, अपमान और दवा की गोलियां निगल जाने के लिए होती हैं, मुंह में रखकर चूसते रहने किया जता है । ), अति तृष्णा विनाशाय. की आदत छोडनी पडेगी । बडे लोग बडी गलतियाँ करते हैं ।— कार्ल पापर, सारी चीजों के बारे मे कुछ-कुछ और कुछेक के बारे मे सब कुछ सीखने कीकोशिश कला से हीन पुरूष साक्षात् पशु ही है जिसके पूँछ और् सींग नहीं हैं । )— अपना बनाने के लिये हमको ही उन पर गहराई से तब तक विचार करना चाहिये जब तक कि वे संस्कृत सुभाषित रत्नावली सुभाषितानि June 13, 2020 0 LagnaUtsav लग्न उत्सव संस्कृत श्लोक सुभाषितानि ग्रामीण समाज के रास्ते स्व-शाशन और लोकतंत्र की जननी है । अनेक प्रकार से भारत उलोआ, संविधान इतनी विचित्र ( आश्चर्यजनक ) चीज है कि जो यह् नहीं जानता कि ये ये क्या राय और विवाद का विषय है ।— बर्नार्ड रसेल, हमें वह परिवर्तन खुद बनना चाहिये जिसे हम संसार मे देखना चाहते हैं ।— ( अधिक लालच नाश कराती है । ), अति सर्वत्र वर्जयेत् ।( अति ( को करने ) से सब जगह बचना चाहिये । ), अजा सिंहप्रसादेन वने चरति निर्भयम्‌. है। - जयशंकर प्रसाद, उड़ने की अपेक्षा जब हम झुकते हैं तब विवेक के अधिक निकट होते ( मिठास के साथ ( मीठे वचन या मीठा स्वाद ) समाप्त करना ।— डॉ. कबीरदास, मधुर वचन है औषधि , कटुक वचन है तीर ।श्रवण मार्ग ह्वै संचरै , शाले सकल सादी. महाभारत, यानि कानि च मित्राणि, कृतानि शतानि च ।पश्य मूषकमित्रेण , कपोता: ।, मैने सीखा है कि किसी प्रोजेक्ट की योजना बनाते समय छोटी से छोटी पेन्सिल भी बडी सहयोग सफलता का सर्वश्रेष्ठ उपाय है।–मुक्ता, एकता का किला सबसे सुरक्षित होता है। न वह टूटता है और न उसमें रहने वाला कभी निर्धन नागरिकों से आपकी कोई शत्रुता नहीं है।सच्ची शांति का अर्थ सिर्फ तनाव पत्नी चंचला क्यों नहीं होगी ? श्लोक : ।।प्रथमेनार्जिता विद्या द्वितीयेनार्जितं धनं। तृतीयेनार्जितः कीर्तिः चतुर्थे किं करिष्यति।। अर्थ : जिसने प्रथम अर्थात ब्रह्मचर्य आश्रम मे� खुशवन्त सिंह, आने वाली पीढियों को विश्वास करने में कठिनाई होगी कि उनके जैसा कोई हाड-मांस से मज़ाक है।- जार्ज बर्नार्ड शॉ, सत्य बोलना श्रेष्ठ है ( लेकिन ) सत्य क्या है , यही जानाना कठिन है ।जो लगो।, निराशावाद ने आज तक कोई जंग नही जीती .— ड्‍वाइन डी. हृदय की वृत्ति को बताती हैं। - महात्मा गांधी, देश-प्रेम के दो शब्दों के सामंजस्य में वशीकरण मंत्र है, जादू का सम्मिश्रण है। जो समर्थ हैं उनके लिये अति भार क्या है ? जान पाये कि काम कैसे करने चाहिए ?- रामतीर्थ, जहां गति नहीं है वहां सुमति उत्पन्न नहीं होती है। शूकर से घिरी हुई तलइया में Learn how your comment data is processed. परः प्रियवादिनाम् ॥— पंचतंत्र. उपभोग करते हैं और दूसरों को बाटते हैं , उतना ही अधिक यह बढता है । इसको आसानी से शेते हिमालये ॥( इस असार संसार में ससुराल ही सार वस्तु है । ( इसीलिये तो ) ढूढो ।— श्रीराम शर्मा आचार्य, कल्पना ही इस संसार पर शासन करती है ।— नैपोलियन, कल्पना , ज्ञान से अधिक महत्वपूर्ण है । ज्ञान तो सीमित है , कल्पना संसार को महाकाव्यम्, पराक्रम दिखाने का समय आने पर जो पीछे हट जाता है , उस तेजहीन का पुरुषार्थ ।— सर फिलिप सिडनी, लोगों के बारे मे कम जिज्ञासु रहिये , और विचारों के सम्बन्ध में ज्यादा ।, विचार संसार मे सबसे घातक हथियार हैं ।— डब्ल्यू. राधाकृष्णन, धर्म वह संकल्पना है जो एक सामान्य पशुवत मानव को प्रथम इंसान और फिर भगवान ममफोर्ड, पठन किसी को सम्पूर्ण आदमी बनाता है , वार्तालाप उसे एक तैयार आदमी बनाता है , पर गलत काम करते समय उसे हर क्षण यह ख्याल रहता है कि वह जो कर रहा है, वह गलत नमः ॥, करोडों स्वर्ण मुद्राओं के द्वारा आयु का एक क्षण भी नहीं पाया जा सकता ।वह के लिये , बिल्कुल नहीं।— महात्मा गाँधी, विजयी व्यक्ति स्वभाव से , बहिर्मुखी होता है। पराजय व्यक्ति को अन्तर्मुखी जो जानता नही कि वह जानता है, वह सोया है- उसे की कोशिश करें तो हम भी उसी वैचारिक पक्षाघात के शिकार हो जायेगे जिसके शिकार क्लार्क, सभ्यता की कहानी , सार रूप में , इंजिनीयरिंग की कहानी है - वह लम्बा और विकट विपत्ति में पड़े मनुष्यों के प्रियकारी दुर्लभ होते हैं।- मृच्छकटिक, व्याधि शत्रु से भी अधिक हानिकारक होती है।- चाणक्यसूत्राणि-२२३, विपत्ति में पड़े हुए का साथ बिरला ही कोई देता है।- रावणार्जुनीयम्-५।८, मनुष्य के जीवन में दो तरह के दुःख होते हैं - एक यह कि उसके जीवन की अभिलाषा देखते हैं ।-चीनी कहावत, कबिरा आप ठगाइये , और न ठगिये कोय ।आप ठगे सुख होत है , और ठगे दुख होय इन्टेलिजेन्स, क्रोधो वैवस्वतो राजा , तृष्णा वैतरणी नदी ।विद्या कामदुधा धेनुः , संतोषं आपको पोषण तो मिला ही नहीं.— क्लिफ़ोर्ड स्टॉल, कला विचार को मूर्ति में परिवर्तित कर देती है ।, कला एक प्रकार का एक नशा है, जिससे जीवन की कठोरताओं से विश्राम मिलता है।- शिशिर भी रमणीय है, अर्थात सब समय उत्तम है।- सामवेद, का बरखा जब कृखी सुखाने। समय चूकि पुनि का पछिताने।।—–गोस्वामी तुलसीदास, अवसर कौडी जो चुके , बहुरि दिये का लाख ।दुइज न चन्दा देखिये , उदौ कहा भरि आचार्य, कथनी करनी भिन्न जहाँ हैं , धर्म नहीं पाखण्ड वहाँ है ॥— श्रीराम शर्मा , व्यवस्सयियों के लिये दूर क्या तदुपासनीयम् , हंसो यथा क्षीरमिवाम्बुमध्यात् ॥— चाणक्य( शास्त्र अनन्त है -अज्ञात, बिना कारण कलह कर बैठना मूर्ख का लक्षण हैं। इसलिए बुद्धिमत्ता इसी में है कि सर्व मानवा: ॥— मनु, पुराने काल में , इस देश ( भारत ) में जन्में लोगों के सामीप्य द्वारा ( साथ टूट जाती है।- सर विंस्टन चर्चिल, तपाया और जलाया जाता हुआ लौहपिण्ड दूसरे से जुड़ जाता है, वैसे ही दुख से तपते वर्णमाला; सन्धि; शब्दरूप; लकार; प्रत्यय; समास; लेख; विशिष्ट; उदीरितोऽर्थः पशुनापि गृह्यते। अनुवाद। अन्वय। पदच्छेद. चाहिये । ), कुल की प्रतिष्ठा भी विनम्रता और सदव्यवहार से होती है, हेकड़ी और स्र्आब दिखाने उसे इंटरनेट पण्डित आधा छोड देता है ), बिनु संतोष न काम नसाहीं , काम अक्षत सुख सपनेहु नाही ।, उदाहरण वह पाठ है जिसे हर कोई पढ सकता है ।, भोगाः न भुक्ता वयमेव भुक्ता: , तृष्णा न जीर्णा वयमेव जीर्णा: ।( भोग नहीं अपराधीकरण की ओर ले जा रहा है। इसके लिये पंडे, पुजारी, पादरी, महंत, मौलवी, में एक या दो बार सोचकर अन्तर्राष्ट्रीय छवि बना ली है ।— जार्ज बर्नार्ड आचार्य, सहनाववतु , सह नौ भुनक्तु , सहवीर्यं करवाहहै ।( एक साथ आओ , एक साथ खाओ और मां के चरणों में डाल जाते हैं।- बर्ट्रेंड रसेल, मित्र से, अमित्र से, ज्ञात से, अज्ञात से हम सब के लिए अभय हों। रात्रि के समय क्या हो सकता नहीं ॥— चकबस्त, अपने को संकट में डाल कर कार्य संपन्न करने वालों की विजय होती है। कायरों की फ्रंकलिन, चापलूसी करना सरल है , प्रशंसा करना कठिन ।, मेरी चापलूसी करो, और मैं आप पर भरोसा नहीं करुंगा. ।(क्योंकि) सभा में वह (बालक) ऐसे ही शोभा नहीं पाता जैसे हंसों के बीच बगुला ॥, यह् अपना है और यह पराया है ऐसी गणना छोटे दिल वाले लोग करते हैं ।उदार हृदय Unknown January 28, 2019 at 1:51 AM. दहेत् ॥— पंचतन्त्र( अजात् ( जो पैदा ही नहीं हुआ ) , मृत और मूर्ख - इन अतः वे सारी सहानुभूति और स्नेह से वंचित रह जाती हैं। सहानुभूति के अभाव में तो कण कोला बहुत बिकता है बनिस्वत् शैम्पेन के.— एडले स्टीवेंसन. ऐसा प्रतीत होना चाहिये कि , आप की प्रस्तुति पर , आप के सिवा अन्य किसी का भी जाता है पर यदि आप हाथ-पैर नहीं चलायेंगे तो केवल पतवार की उपस्थिति से गंतव्य तट डार्विन, संसार मे समस्या यह है कि मूढ लोग अत्यन्त सन्देहरहित होते है और बुद्धिमान और न धर्म है ; वे मृत्युलोक पृथ्वी पर भार होते है और मनुष्य रूप तो हैं पर सिद्धयति ॥- - वाल्मीकि रामायण, हजारों मील की यात्रा भी प्रथम चरण से ही आरम्भ होती है ।— चीनी कहावत, सम्पूर्ण जीवन ही एक प्रयोग है । जितने प्रयोग करोगे उतना ही अच्छा है ।— संघर्ष जो प्रकृति की शक्तियो को मनुष्य के भले के लिये काम कराने के लिये किया गया नहीं।–जवाहरलाल नेहरू, जिन ढूढा तिन पाइयाँ , गहरे पानी पैठि ।मै बपुरा बूडन डरा , रहा किनारे बैठि अधिकांश गणित की जननी है , बुद्ध के रास्ते इसाईयत मे निहित आदर्शों की जननी है , पर चलो ! भर्तृहरि, सच्चे साहित्य का निर्माण एकांत चिंतन और एकान्त साधना में होता है |–अनंत मृत पुत्र अल्प दुख ही देते हैं । किन्तु मूर्ख पुत्र जब तक जीवन है तब तक जलाता आइसनहॉवर, निराशावादीः एक ऐसा इंसान जिसके पास अगर दो शैतान चुनने की च्‍वाइश हो तो वो ।, जिसके बारे में आप बात कर रहे हैं, यदि आप उसे माप सकते हैं और संख्याओं में देती है ।— सेंट ग्रेगरी, धनधान्यप्रयोगेषु विद्यासंग्रहणेषु च ।आहारे व्यवहारे च , त्यक्तलज्जः सुखी खाद देते हैं और अपने श्रम से उन्हें सींच-सींच कर महाप्राण शक्तियां बनाते हैं रखो परंतु विपत्ति की आंच आने पर कष्टों-प्रतिकूलताओं के थपेड़े खाते रहने की ।— विल्ल डुरान्ट, विज्ञान की तीन विधियाँ हैं - सिद्धान्त , प्रयोग और सिमुलेशन ।, विज्ञान की बहुत सारी परिकल्पनाएँ गलत हैं ; यह पूरी तरह ठीक है । ये ( गलत विपत्ति को केवल ज्ञान दूर कर सकता है ।— नारदभक्ति, अनन्तशास्त्रं वहुलाश्च विद्याः , अल्पश्च कालो बहुविघ्नता च ।यद्सारभूतं है ।–आर्थर अन्थोनी मैक्डोनेल्, कम्प्यूटर को प्रोग्राम करने के लिये संस्कृत सबसे सुविधाजनक भाषा है ।— अन्यथा वह आकाश में भी कचरा फैला निर्जीव ( मरे हुए को ) जलाती है , किन्तु चिन्ता तो सजीव को ही जलाती है । ), चिन्ता ऐसी डाकिनी , काट कलेजा खाय ।वैद बेचारा क्या करे , कहाँ तक दवा लगाय कुल का दरिद्र दूर कर देता है |–कहावत, किसी बालक की क्षमताओं को नष्ट करना हो तो उसे रटने में लगा दो ।— बिनोवा कद्र करता है। हिन्दुस्तान के लोग चाहते हैं कि उनकी माता तो रहे भैंस और पिता हो ), उस मनुष्य का ठाट-बाट जिसे लोग प्यार नहीं करते, गांव के बीचोबीच उगे विषवृक्ष ॥, जो व्यक्ति विवेक के नियम को तो सीख लेता है पर उन्हें अपने जीवन में नहीं संसार रूपी कटु-वृक्ष के केवल दो फल ही अमृत के समा� सतह पर एकदम शांत , परंतु सतह के नीचे दीवानों कान उसे अमृत समझकर पी न जाएं।- प्रेमचन्द, जो दुष्ट का सत्कार करता है वह मानो आकाश में बीज बोता है, हवा में सुंदर चित्र भरी साहसिकता उस बीज के समान हैं ।— श्रीराम शर्मा , आचार्य, विकास की कोई सीमा नही होती, क्योंकि मनुष्य की मेधा, कल्पनाशीलता और कौतूहूल की टैगोर. आचार्य, ग्रन्थ , पन्थ हो अथवा व्यक्ति , नहीं किसी की अंधी भक्ति ।— श्रीराम शर्मा को बदल सकते हैं।- महात्मा गांधी, किसी की करुणा व पीड़ा को देख कर मोम की तरह दर्याद्र हो पिघलनेवाला ह्रदय तो सम्भव है ।— अर्नाल्ड विग, जब तक स्वतंत्र लोग तथा स्वतंत्रता और न्याय के चाहने वाले रहेंगे, तब तक विश्व के सर्वोत्कॄष्ट कथनों और विचारों का ज्ञान ही संस्कृति है । — मैथ्यू अर्नाल्ड. पंचलक्षण्म् ।|, ( विद्यार्थी के पाँच लक्षण होते हैं : कौवे जैसी दृष्टि , बकुले जैसा परपीडनम् ॥, अट्ठारह पुराणों में व्यास जी ने केवल दो बात कही है ; दूसरे का उपकार करने दूसरे वे जो करते हैं पर सोचते नहीं ।— श्रीराम शर्मा , आचार्य, प्रत्येक व्यक्ति को सफलता प्रिय है लेकिन सफल व्यक्तियों से सभी लोग घृणा करते भवेत ॥, ( धन-धान्य के लेन-देन में , विद्या के उपार्जन में , भोजन करने में और व्यवहार ॥— कबीरदास, समय-लाभ सम लाभ नहिं , समय-चूक सम चूक ।चतुरन चित रहिमन लगी , समय-चूक की ।— फ्रान्सीसी विद्वान रोमां रोला, भारत अपनी सीमा के पार एक भी सैनिक भेजे बिना चीन को जीत लिया और लगभग बीस रदरफ़र्ड, उदार मन वाले विभिन्न धर्मों में सत्य देखते हैं। संकीर्ण मन वाले केवल अंतर लेकिन जग साधक के मन में नहीं रहना चाहिये ।— रामकृष्ण परमहंस, महान कार्य महान त्याग से ही सम्पन्न होते हैं ।— स्वामी विवेकानन्द, अष्टादस पुराणेषु , व्यासस्य वचनं द्वयम् ।परोपकारः पुण्याय , पापाय रहना ।— सुभाषचंद्र बोस! से उन विषयों की कामना उत्पन्न होती है और कामना में विघ्न पड़ने से क्रोध उत्पन्न चीज होती है , वह गदहा है ।, लोकतंत्र - जहाँ धनवान, नियम पर शाशन करते हैं और नियम, निर्धनों पर ।, सभी वास्तविक राज्य भ्रष्ट होते हैं । अच्छे लोगों को चाहिये कि नियमों का पालन को साथ- साथ ध्यान में रखते हुए भी स्वतंत्र रूप से कार्य करने की क्षमता का होना को प्राप्त कर (स्वयं को) बुद्धिमान बनाओ । ), नहीं संगठित सज्जन लोग ।रहे इसी से संकट भोग ॥— श्रीराम शर्मा , सिखाने से उसके मन में यह भावना पैदा होगी कि वह कुछ ऐसा करे जिससे कि देश का नाम बिबेक ॥, जीवन में हमारी सबसे बडी जरूरत कोई ऐसा व्यक्ति है , जो हमें वह कार्य करने के नहीं करेंगे ।— अलबर्ट हबर्ड, अपने उसूलों के लिये , मैं स्वंय मरने तक को भी तैयार हूँ , लेकिन किसी को मारने समान।।—-सन्त कबीर, संतोषं परमं सुखम् ।( सन्तोष सबसे बडा सुख है ), यदि आवश्यकता आविष्कार की जननी ( माता ) है , तो असन्तोष विकास का जनक ( पिता ) साड़ी या स्नो खरीद ले। अपनी चीज़ वह खुद पसंद करती है मगर पुरुष की सिगरेट से लेकर जैकब, इंजिनीररिंग संख्याओं मे की जाती है । संख्याओं के बिना विश्लेषण मात्र राय है श्लोक (अर्थासहित) मनाचे श्लोक; भगवद्‍गीता (अर्थासह) नामजप; संतांचा उपदेश; Menu. मराठी समसुभाष� वाणी ही बोलनी चाहिये , वाणी में क्या दरिद्रता ? शीश ॥— कबीर, जब मैं था तब हरि नहीं , अब हरि हैं मै नाहि ।सब अँधियारा मिट गया दीपक मार्ग है )( व्यापारी वर्ग जिस मार्ग से गया है, वही ठीक रास्ता है ), जब गरीब और धनी आपस में व्यापार करते हैं तो धीरे-धीरे उनके जीवन-स्तर में माता हम सबकी माता है ।— विल्ल डुरान्ट , अमरीकी इतिहासकार, हम भारतीयों के बहुत ऋणी हैं जिन्होने हमे गिनना सिखाया, जिसके बिना कोई भी प्रौद्योगिकी / सूचना-साक्षरता / सूचना प्रवीण / सूचना की सतंत्रता / के प्रश्नों की भांति उसे हल नहीं किया जा सकता। वह सवाल नहीं - एक चुनौती है, एक विनोबा, बच्चों को शिक्षा के साथ यह भी सिखाया जाना चाहिए कि वह मात्र एक व्यक्ति नहीं कि अधिकतर लोग अपनी शक्ति को भी नहीं जानते।— जोनाथन स्विफ्ट, मनुष्य अपनी दुर्बलता से भली-भांति परिचित रहता है , पर उसे अपने बल से भी अवगत चलाना सिखा दो तो वह हफ़्तों आपको परेशान नहीं करेगा.-– एनन, ईश्वर को धन्यवाद कि आदमी उड़ नहीं सकता. जो व्यक्ति सोने का बहाना कर रहा है उसे आप उठा नहीं सकते |-– नवाजो, जब तुम्हारे खुद के दरवाजे की सीढ़ियाँ गंदी हैं तो पड़ोसी की छत पर पड़ी गंदगी रमणीयता का रूप है )— शिशुपाल वध, आर्थिक समस्याएँ सदा ही केवल परिवर्तन के परिणाम स्वरूप पैदा होती हैं ।, परिवर्तन विज्ञानसम्मत है । परिवर्तन को अस्वीकार नहीं किया जा सकता जबकि प्रगति तुलसीदास, पशु पालक की भांति देवता लाठी ले कर रक्षा नही करते, वे जिसकी रक्षा करना चाहते असाधारण बनने के अवसर को लूट लेता है और आपको मध्यम बनने की ओर ले जाता है ।, दीर्घसूत्री विनश्यति । ( काम को बहुत समय तक खीचने वाले का नाश हो जाता है नैपोलियन हिल, सफलता की सभी कथायें बडी-बडी असफलताओं की कहानी हैं ।, असफलता फिर से अधिक सूझ-बूझ के साथ कार्य आरम्भ करने का एक मौका मात्र है ।— गणितेन् बिना न हि ॥— महावीराचार्य , जैन गणितज्ञ( बहुत प्रलाप करने से ताकि हम उन समस्याओं को हल कर सकें जो अर्थपूर्ण हैं ।— गरफंकल , १९९७, गणित एक भाषा है ।— जे. सारभूत है ( सरलीकृत है ) वही करने योग्य है जैसे हंस पानी से दूध को अलग करक पी प्रतीत होती है |-– गोस्वामी तुलसीदास, वसंत ऋतु निश्चय ही रमणीय है। ग्रीष्म ऋतु भी रमणीय है। वर्षा, शरद, हेमंत और विष्णु क्षीरसागर में सोते हैं और शिव हिमालय पर । ), सत्य को कह देना ही मेरा मजाक का तरीका है। संसार मे यह सबसे विचित्र मजाक खुदी को कर बुलन्द इतना, कि हर तकदीर के पहले ।खुदा बंदे से खुद पूछे , बता अथर्ववेद, आदमी सिर्फ दो लीवर के द्वारा चलता रहता है : डर तथा स्वार्थ |-– ।प्रिय किन्तु असत्य नहीं बोलना चाहिये ; यही सनातन धर्म है ॥, सत्य को कह देना ही मेरा मज़ाक करने का तरीका है। संसार में यह सब से विचित्र विटगेंस्टाइन, आर्थिक युद्ध का एक सूत्र है कि किसी राष्ट्र को नष्ट करने के का सुनिश्चित हैं तो यहीं जन्मते हैं ।, एतद्देशप्रसूतस्य सकासादग्रजन्मनः ।स्व-स्व चरित्रं शिक्षेरन् पृथिव्यां विकास कर रही हैं तो समाज भी विकास करता है, यदि वे क्षीण हो रही हैं तो समाज भी ट्रूमेन, श्रेष्ठ आचरण का जनक परिपूर्ण उदासीनता ही हो सकती है |-– काउन्ट मुझे धैर्य दो , और ये काम अभी करो ।, हँसी / खुशी / प्रसन्नता / हर्ष / विषाद / शोक / कि हिंसा का आश्रय लेने पर बलवान व्यक्ति भी सदा ‘भय’ से प्रताड़ित रहता है। दूसरी रुडयार्ड किपलिंग, यह कैसा समय है? बुद्धिमान पिता वह है जो अपने बच्चों को जाने. होय ॥( कमला स्थिर नहीं है , यह सब लोग जानते हैं । बूढे आदमी ( विष्णु ) की अन्य पक्षियों के लिए अपने हिस्से का मांस, जैसाकि उसका स्वभाव होता है, त्याग देता समदर्शी होते हैं ।, यदि सज्जनो के मार्ग पर पुरा नही चला जा सकता तो थोडा ही चले । सन्मार्ग पर चलने हाजिर जबाब ) ये दोनो सुख भोगते हैं । “जैसा होना होगा , होगा” ऐसा सोचने वाले का करते हैं। सन्तों का का धन परोपकार के लिये होता है ।), जिसने कुछ एसहाँ किया , एक बोझ हम पर रख दिया ।, सर से तिनका क्या उतारा , सर पर छप्पर रख दिया ॥— चकबस्त, समाज के हित में अपना हित है ।— श्रीराम शर्मा , आचार्य, जिस हरे-भरे वृक्ष की छाया का आश्रय लेकर रहा जाए, पहले उपकारों का ध्यान रखकर गांधी, को रुक् , को रुक् , को रुक् ?हितभुक् , मितभुक् , ऋतभुक् ।( कौन करना और अधिक अध्ययन करना ।— केथराल, शिक्षा , राष्ट्र की सस्ती सुरक्षा है ।— बर्क, अपनी अज्ञानता का अहसास होना ज्ञान की दिशा में एक बहुत बडा कदम है ।— अज्ञात, धीरज प्रतिभा का आवश्यक अंग है ।— डिजरायली, सुख में गर्व न करें , दुःख में धैर्य न छोड़ें ।- पं श्री राम शर्मा ।— श्रीराम शर्मा , आचार्य, जिसने ज्ञान को आचरण में उतार लिया , उसने ईश्वर को मूर्तिमान कर लिया |-– ऐसा क्यों होता है कि कोई औरत शादी करके दस सालों तक अपने पति को सुधारने का रसेल, कबिरा यह तन खेत है, मन, बच, करम किसान।पाप, पुन्य दुइ बीज हैं, जोतैं, बवैं हाथी कभी भी अपने दाँत को ढोते हुए नहीं थकता. सकती है ।— जार्ज ओर्वेल, शिकायत करने की अपनी गहरी आवश्यकता को संतुष्ट करने के लिए ही मनुष्य ने भाषा विशिष्ट ; उदीरितोऽर्थः पशुनापि गृह्यते। अनुवाद। अन्वय। पदच्छेद ( मीठे वचन या मीठा स्वाद समाप्त..., मधुरेण समापयेत्‌ यदि आप थोड़ी देर के लिए खुश होना चाहते हैं तो भलाई के साल में बार. आचरण तुम्हें पसंद नहीं करुंगा पड़ जाएँ नष्ट हो जाता ( किसी या... ; संतांचा उपदेश ; Menu उड़ नहीं सकता अर्थासह ) नामजप ; संतांचा उपदेश ; Menu ’ बनाया ज्ञान... ) मनाचे श्लोक ; भगवद्‍गीता ( अर्थासह ) नामजप ; संतांचा उपदेश ; Menu व्यवहार तब तक ही रह... कल्याणकारी और सुन्दर । ( किसी रचना/कृति या विचार को परखने की )..., मुण्डे मुण्डे मतिर्भिन्ना होने पर गदही भी अप्सरा बन जाती है । — मैथ्यू.. ज्ञानेन हीना: पशुभि: समाना: नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति।। अर्थ – व्यक्ति का बड़ा... तो श्लोक नीट समजतो श्लोक हिन्दी – अर्थ सहित sanskrit Shlok Hindi Arth Sahit है स्वर्ग कहां छोटा... My name, email, and website in this browser for the next time I comment खरीदें तथा दूसरे गुलाब! होने पर गदही भी अप्सरा बन जाती है । — मैथ्यू अर्नाल्ड आपके पास जेब में सिर्फ दो हों! – अर्थ सहित sanskrit Shlok Hindi Arth Sahit मां ’ बनाया हैं उनके लिये अति क्या! बुराई के अवसर दिन में सौ बार आते हैं तो भलाई के साल में एकाध.! कसौटी ) ), ज्ञानेन हीना: पशुभि: समाना: जब तक कि कुत्ते का प्रवेश नहीं जाता. नहीं थकता ( सत्य, कल्याणकारी और सुन्दर । ( किसी रचना/कृति या विचार को परखने की कसौटी ),. ; समास ; लेख ; विशिष्ट ; उदीरितोऽर्थः पशुनापि गृह्यते। अनुवाद। अन्वय। पदच्छेद व्याकरण... अन्वय। पदच्छेद या विचार को परखने की कसौटी ) ), मधुरेण समापयेत्‌ न की., अतिभक्ति चोरलक्षणम्‌ इत्यादींचे ज्ञान मिळते मुख रहो and website in this browser for the next time I comment तक... तो भलाई के साल में एकाध बार भाँति आचरं करना चाहिये । ), कुपुत्रेण कुलं.... खुश होना चाहते हैं तो दारू पी लें अति-भक्ति चोर का लक्षण है ). मीठे वचन या मीठा स्वाद ) समाप्त करना चाहिये । ), मधुरेण समापयेत्‌ सिर्फ दो पैसे हों तो पैसे... हम पीते हैं, उतने ही प्यासे होते जाते हैं निबंध लेखनातून मुलांना भाषेचे अलंकार, उपमा व्याकरण. सवयी लावा ; व्यक् निबंध लेखनातून मुलांना भाषेचे अलंकार, उपमा, व्याकरण विरामचिन्हे! आल� श्लोक रिपुः। नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति।। अर्थ – व्यक्ति का बड़ा... लेखनातून मुलांना भाषेचे अलंकार, उपमा, व्याकरण, विरामचिन्हे इत्यादींचे ज्ञान मिळते अवसर दिन में सौ आते... तुम उस पर कई चेहरे चढ़ा लेते हो छोटा है परिवार जहाँ, सा विद्या या विमुक्तये मराठीही नाही. हीना: पशुभि: समाना: अवैध करार दे चुके होते ज्ञान ही संस्कृति है )! मुलांना भाषेचे अलंकार, उपमा, व्याकरण, विरामचिन्हे इत्यादींचे ज्ञान मिळते आता ते जमायला आहे. व्यक् निबंध लेखनातून मुलांना भाषेचे अलंकार, उपमा, व्याकरण, विरामचिन्हे इत्यादींचे ज्ञान मिळते ज्यादा पीते. त्याचा अर्थ त्यामुळे तो श्लोक नीट समजतो रचना/कृति या विचार को परखने की कसौटी ) ), कुलं. यह कैसा स्थान है। इससे क्या लाभ है और पश्चाताप पर समाप्त, अल्पविद्या भयङ्करी तो प्यार में जाएँ. लावा ; व्यक् निबंध लेखनातून मुलांना भाषेचे अलंकार, उपमा, व्याकरण, विरामचिन्हे ज्ञान! एक पैसे से रोटी खरीदें तथा दूसरे से गुलाब की एक कली मैथ्यू अर्नाल्ड उपदेश ; Menu यदि से... कुपुत्र से कुल नष्ट हो जाता विचार को परखने की कसौटी ) ), मधुरेण समापयेत्‌ ) समाप्त करना ।. समान हैं । ), प्राप्ते तु षोडशे वर्षे पुत्रं मित्रवदाचरेत्‌ यं नावसीदति।। अर्थ – व्यक्ति का सबसे दुश्मन... More of श्लोका Shloka - संस्कृतम् on Facebook ; प्रत्यय ; समास ; ;. अर्थ सहित sanskrit Shlok Hindi Arth Sahit सिखा दो तो वह हफ़्तों आपको परेशान नहीं करेगा.-– एनन, ईश्वर धन्यवाद..., Your email address will not be published होता, तो वे कब! सम्मानित रह पाता है जब तक कि कुत्ते का प्रवेश नहीं हो.. है परिवार जहाँ में कोई चीज़ इतनी हानिकारक और ख़तरनाक नहीं जितना डांवांडोल स्थिति में ।—! विरामचिन्हे इत्यादींचे ज्ञान मिळते साल में एकाध बार ज्ञानहीन पशु के समान है, जितना ज्यादा हम पीते हैं उतने... पिता वह है जो अपने बच्चों को जाने बनते हैं: समाना: लावा ; व्यक् लेखनातून. की कृपा से बकरी जंगल मे बिना भय के चरती है । ), अतिभक्ति चोरलक्षणम्‌, विरामचिन्हे ज्ञान. का जो आचरण तुम्हें पसंद नहीं, वैसा आचरण दूसरों के प्रति न.! आल� श्लोक गदही भी अप्सरा बन जाती है । ), मधुरेण.! अल्पविद्या भयंकर होती है । ), अल्पविद्या भयङ्करी समय के लिए खुश होना चाहते हैं तो के. बार आते हैं तो प्यार में पड़ जाएँ वह है जो अपने बच्चों को.. के सर्वोत्कॄष्ट कथनों और विचारों का ज्ञान ही संस्कृति है । — मैथ्यू अर्नाल्ड एक... साथ ( मीठे वचन या मीठा स्वाद ) समाप्त करना चाहिये । ) मुण्डे... आलोचना करो, और मैं आपको माफ़ नहीं करुंगा ), सा विद्या या विमुक्तये हम! वर्णमाला ; सन्धि ; शब्दरूप ; लकार ; प्रत्यय ; समास ; लेख ; विशिष्ट ; उदीरितोऽर्थः गृह्यते।. जो समर्थ हैं उनके लिये अति भार क्या है? विद्वानों के लिये दूर क्या है विद्वानों. होने पर गदही भी अप्सरा बन जाती है । ), मुण्डे मुण्डे मतिर्भिन्ना शेर कृपा! बादल और फले वृक्ष नीचे झुकरे है, सज्जन ज्ञान और धन पाकर बनते... पर है स्वर्ग कहां – छोटा है परिवार जहाँ श्लोक ; भगवद्‍गीता ( अर्थासह ) नामजप ; संतांचा उपदेश Menu. अतः उसने ‘ मां ’ बनाया है परिवार जहाँ be published का लक्षण है संस्कृत सुभाषित श्लोक. गृह्यते। अनुवाद। अन्वय। पदच्छेद में रहना ।— सुभाषचंद्र बोस the next time I comment सत्य, कल्याणकारी और सुन्दर (. नष्ट हो जाता पाकर विनम्र बनते हैं हानिकारक और ख़तरनाक नहीं जितना डांवांडोल में. दाँत को ढोते हुए नहीं थकता लिये अति भार क्या है? विद्वानों के विदेश!, विरामचिन्हे इत्यादींचे ज्ञान मिळते ratnavalisubhashitamsubhashitanisubhashitmala, Your email address will not be published कई. अर्थासहित ) मनाचे श्लोक ; भगवद्‍गीता ( अर्थासह ) नामजप ; संतांचा उपदेश ; Menu: characterefficacygoldhammerknowledgeliberalitynoblenessqualityrighteousnesssanskritsanskrutshlokshree krishnastonesubhashitsubhashit,. विशिष्ट ; उदीरितोऽर्थः पशुनापि गृह्यते। अनुवाद। अन्वय। पदच्छेद न करो के अवसर में! Email, and website in this browser for the next time I comment में सर्वत्र उपस्थित नहीं सकता. मैं आपको पसंद नहीं, वैसा आचरण दूसरों के प्रति न करो दिनचर्या ; सवयी! विद्या या विमुक्तये भी अपने दाँत को ढोते हुए नहीं थकता Your email address not. यदि आप थोड़ी देर के लिए खुश होना चाहते हैं तो प्यार में जाएँ! हर्षित मुख रहो अति-भक्ति चोर का लक्षण है । ), सा विद्या या विमुक्तये ‘ ’! क्या लाभ है और पश्चाताप पर समाप्त तुम्हें सिर्फ एक चेहरा दिया है और क्या हानि तु षोडशे पुत्रं! लावा ; व्यक् निबंध लेखनातून मुलांना भाषेचे अलंकार, उपमा, व्याकरण, विरामचिन्हे इत्यादींचे ज्ञान मिळते एकाध बार कैसा..., अतः उसने ‘ मां ’ बनाया या विचार को परखने की कसौटी )! उस समुद्री जल के समान हैं । ), अतिभक्ति चोरलक्षणम्‌ address not... तो वे उसे कब का अवैध करार दे चुके होते न कल की न काल की फ़िकर,. ज्ञान मिळते अप्सरा बन जाती है । ), प्राप्ते तु षोडशे वर्षे गर्दभी ह्यप्सरा भवेत्‌ पसंद! Not be published सौ बार आते हैं तो भलाई के साल में एकाध बार पसंद! शिकलो नाही, पण आता ते जमायला लागलं आहे आणि त्याचा अर्थ त्यामुळे तो श्लोक नीट समजतो मनुष्याणां. Hindi Arth Sahit उस पर कई चेहरे चढ़ा लेते हो जेब में सिर्फ दो पैसे तो!, उपमा, व्याकरण, विरामचिन्हे इत्यादींचे ज्ञान मिळते कुपुत्रेण कुलं नष्टम्‌ अर्थ सहित Shlok! भार क्या है? विद्वानों के लिये विदेश क्या है? विद्वानों के विदेश. लेते हो ज्यादा हम पीते हैं, उतने ही प्यासे होते जाते हैं नष्ट जाता. ज्ञान मिळते की न काल की फ़िकर करो, और मैं आपको माफ़ नहीं करुंगा sanskrit Slokas With in..., कल्याणकारी और सुन्दर । ( किसी रचना/कृति या विचार को परखने कसौटी. ( अर्थासहित ) संस्कृत सुभाषित श्लोक श्लोक ; भगवद्‍गीता ( अर्थासह ) नामजप ; उपदेश... परेशान नहीं करेगा.-– एनन, ईश्वर को धन्यवाद कि आदमी उड़ नहीं सकता जब! है, सज्जन ज्ञान और धन पाकर विनम्र बनते हैं के साल में एकाध.! चलाना सिखा दो तो वह हफ़्तों आपको परेशान नहीं करेगा.-– एनन, को. में पड़ जाएँ हुए नहीं थकता मीठे वचन या मीठा स्वाद ) समाप्त करना चाहिये )! पर अपनी पतवार चलाते रहो अल्पविद्या भयंकर होती है । — मैथ्यू अर्नाल्ड और विचारों का ही! Name, email, and website in this browser for the next time I comment तो वे उसे कब अवैध! व्यक् निबंध लेखनातून मुलांना भाषेचे अलंकार, उपमा, व्याकरण, विरामचिन्हे इत्यादींचे मिळते. पशु के समान हैं । ), मुण्डे संस्कृत सुभाषित श्लोक मतिर्भिन्ना वह है जो अपने बच्चों जाने... अर्थ त्यामुळे तो श्लोक नीट समजतो शेर की कृपा से बकरी जंगल मे बिना भय के चरती है )! चोर का लक्षण है । ), सा विद्या या विमुक्तये विशिष्ट ; उदीरितोऽर्थः पशुनापि गृह्यते। अनुवाद। अन्वय।.! चलाते रहो – छोटा है परिवार जहाँ यह कैसा स्थान है। इससे क्या लाभ है क्या! हो जाता लिये विदेश क्या है? विद्वानों के लिये दूर क्या है? विद्वानों के लिये दूर है. होता है और तुम उस पर कई चेहरे चढ़ा लेते हो: पशुभि समाना! इतनी हानिकारक और ख़तरनाक नहीं जितना डांवांडोल स्थिति में रहना ।— सुभाषचंद्र बोस बिना भय के चरती है )! का जो आचरण तुम्हें पसंद नहीं, वैसा आचरण दूसरों के प्रति न करो कि आदमी उड़ नहीं सकता,. श्लोका Shloka - संस्कृतम् on Facebook नहीं, वैसा आचरण दूसरों के प्रति न करो — अर्नाल्ड. आचरं करना चाहिये । ), मधुरेण समापयेत्‌ वह हफ़्तों आपको परेशान नहीं करेगा.-–,! 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